













आचार्य द्विवेदी का साहित्य शोध की थाती: डॉ. त्रिपाठी
डॉ. चंदन तिवारी को मिला प्रथम ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान’
नई दिल्ली। सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को याद करते हुए कहा, “पंडित जी का पूरा साहित्य और आलोचना शोध पर आधारित है। वे सदैव अपने छात्रों को शोध की गहराई में उतरने के लिए प्रेरित करते थे। उनका मानना था कि विषय में जितना डूबोगे, उतने ही मोती पाओगे।उन्होंने कहा कि आज पंडित जी इस बात से बेहद प्रसन्न होते कि उनके नाम पर एक ऐसे सम्मान की शुरुआत हुई है जो पूर्णतः शोध को समर्पित है।
डॉ त्रिपाठी साहित्य अकादमी सभागार में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित प्रथम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय सलूंबर, राजस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंदन तिवारी के शोध प्रबंध ‘आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का भाषा चिंतन’ को पहले आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान से सम्मानित किया गया। डॉ. तिवारी को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह, सर्टिफिकेट, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्य और 21 हजार रुपए की नगद धनराशि प्रदान की गई। यह धनराशि सुरेंद्र शर्मा जी ने अपनी तरफ से डॉ चंदन तिवारी को दी। इसके अतिरिक्त राजकमल प्रकाशन द्वारा उनके शोध प्रबंध पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
आगामी कार्यक्रम/ घोषणा
📢 आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट की घोषणा
ट्रस्ट अपनी वार्षिक स्मारिका “पुनर्नवा” के पाँचवें अंक के लिए लेख आमंत्रित कर रहा है। इस अंक में ट्रस्ट की गतिविधियों के साथ-साथ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर हो रहे लेखन और शोध से संबंधित सामग्री प्रकाशित की जाएगी।
✍️ प्रत्येक लेख कम से कम 1500 शब्दों का होना आवश्यक है।
📧 इच्छुक लेखक अपना लेख info@hpDwiveditrust.in पर ईमेल करें।
📅 लेख भेजने की अंतिम तिथि: 30 जून 2026।
📝 लेखों के प्रकाशन का निर्णय संपादक मंडल द्वारा किया जाएगा।
⚠️ कृपया ध्यान दें: किसी भी लेखन के लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। यह पूरी तरह से स्वैच्छिक सेवा है।
आइए, आचार्य द्विवेदी की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहभागी बनें।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट
द्वितीय शोध सम्मान – औपचारिक घोषणा
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट यह घोषणा करता है कि द्वितीय आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान हेतु आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
योग्यता:
– यह सम्मान उन शोधार्थियों के लिए है जिन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व या व्यक्तित्व पर शोध कार्य किया है और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
– केवल वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने विगत पाँच वर्षों में पीएचडी अथवा डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की है।
आवेदन प्रक्रिया:
– उम्मीदवार को अपना फोटो, संक्षिप्त परिचय, विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त पीएचडी उपाधि का प्रमाण पत्र तथा अपने शोध ग्रन्थ (थीसिस) की पीडीएफ प्रति प्रस्तुत करनी होगी।
– आवेदन की अंतिम तिथि: 30 नवम्बर 2026।
चयन प्रक्रिया:
– प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन छह सदस्यीय जूरी द्वारा किया जाएगा।
– विजेता की घोषणा 15 जनवरी 2027 को की जाएगी।
– उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट – एक परिचय
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय संस्कृति के प्रखर व्याख्याता और हिन्दी साहित्य के महान चिंतक थे। भारतीय परंपरा और संस्कृति पर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि आज भी साहित्यिक और बौद्धिक जगत की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। यही विवेकपूर्ण और वैज्ञानिक सोच आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट के मूल दर्शन का आधार है।
इस ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2021 में हुई, जिसका उद्देश्य आचार्य जी के लेखन, विचार और दृष्टिकोण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं तक पहुंचाना है। साथ ही, ट्रस्ट का प्रयास है कि डिजिटल युग में हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता को बढ़ाया जाए। ट्रस्ट शिक्षा, पर्यावरण, साहित्यिक शोध और सांस्कृतिक संवाद—इन चार प्रमुख क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इन सभी प्रयासों के माध्यम से ट्रस्ट हिन्दी भाषा के समृद्ध भविष्य और आचार्य जी की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन हेतु ट्रस्ट की पहल
हिन्दी भाषा और शोध को समर्पित हमारा विस्तार
पंख – शिक्षा के माध्यम से उड़ान
साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन हेतु ट्रस्ट की पहल
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
हिन्दी के श्रेष्ट निबन्धकार आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई0 में बलिया जनपद के दूबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम अनमोल द्विवेदी था ।
इनके पिता एक ज्योतिषि और संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे; अत: इन्हें ज्योतिष और संस्कृत की शिक्षा उत्तराधिकार में प्राप्त हुई। काशी जाकर इन्होंने संस्कृत – साहित्य और ज्योतिष का उच्चस्तरीय ज्ञान प्राप्त किया। इनकी प्रतिमा का विशेष विकास विश्वविख्यात संस्था शान्ति निकेतन में हुआ । वहाँ ये 11 वर्ष तक हिन्दी भवन के निदेशक के रुप में कार्य करते रहें। वहीं इनके विस्तृत अध्ययन और लेखक का कार्य प्रारम्भ हुआ।
सन् 1949 ई0 में लखनऊ विश्वविद्याल ने इन्हें डी0लिट की उपाधि से तथा सन् 1957 ई0 में भारत सरकार ने ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से विभूषित किया।
इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्याल और पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर कार्य किया तथा उत्तर प्रदेश सरकार की हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के अध्यक्ष रहे। तत्पश्चात् ये हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के सभापति भी रहे। 19 मई, 1979 ई0 को इनका महाप्रयाण हो गया।

